आखिर क्यों ....हम ही बुरे बन जाते हैं?
जिसकी गलतीयों को हम
नादान समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं,
वही हमें गुनहगार मान बैठता है ...
जब दिल में जो आया बोल देता है..
खामोशी को आपकी कमजोरी समझता है..
जाने कितनी बार चोट दे जाता है..
लेकिन गलती तो बेशक अपनी ही होती है..
हम रिश्ते का लिहाज रखते जाते हैं..
जिल्लत भी सहते जाते हैं..
कुछ न कर के भी बुरे बन जाते हैं!
क्योंकि,
हर शख़्स बस खुद को जानता है
किसी को समझना नही चाहता..
जानता है तो बस परखना!
✍️अनुपमा
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